بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ وَٱلْعَصْرِ
गवाह है गुज़रता समय,
سُورَةُ العَصۡرِ
मात्र तीन आयतों की, फिर भी अल-शाफ़िई ने कहा कि यदि लोग सिर्फ़ इसी सूरह पर ग़ौर करें तो यह उनके लिए काफ़ी होगी।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ وَٱلْعَصْرِ
गवाह है गुज़रता समय,
إِنَّ ٱلْإِنسَٰنَ لَفِى خُسْرٍ
कि वास्तव में मनुष्य घाटे में है,
إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّٰلِحَٰتِ وَتَوَاصَوْا۟ بِٱلْحَقِّ وَتَوَاصَوْا۟ بِٱلصَّبْرِ
सिवाय उन लोगों के जो ईमान लाए और अच्छे कर्म किए और एक-दूसरे को हक़ की ताकीद की, और एक-दूसरे को धैर्य की ताकीद की