سُورَةُ النَّاسِ

An-Naasमानवजाति

मक्की
6 आयतें~1 मिनट

क़ुरआन की समापन सूरह, ख़ुदा से उस फुसफुसाने वाले से सुरक्षा माँगती है जो लोगों के दिलों में चुपके से घुस आता है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

114:1

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلنَّاسِ

कहो, "मैं शरण लेता हूँ मनुष्यों के रब की

114:2

مَلِكِ ٱلنَّاسِ

मनुष्यों के सम्राट की

114:3

إِلَٰهِ ٱلنَّاسِ

मनुष्यों के उपास्य की

114:4

مِن شَرِّ ٱلْوَسْوَاسِ ٱلْخَنَّاسِ

वसवसा डालनेवाले, खिसक जानेवाले की बुराई से

114:5

ٱلَّذِى يُوَسْوِسُ فِى صُدُورِ ٱلنَّاسِ

जो मनुष्यों के सीनों में वसवसा डालता हैं

114:6

مِنَ ٱلْجِنَّةِ وَٱلنَّاسِ

जो जिन्नों में से भी होता हैं और मनुष्यों में से भी

सूरह An-Naas के बारे में

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूरह An-Naas में कितनी आयतें हैं?
सूरह An-Naas (मानवजाति) कुरान का अध्याय 114 है और इसमें 6 आयतें हैं।
क्या सूरह An-Naas मक्का में या मदीना में अवतरित हुई थी?
सूरह An-Naas एक मक्की सूरह है, कुरान का 114वाँ अध्याय।
सूरह An-Naas किस बारे में है?
क़ुरआन की समापन सूरह, ख़ुदा से उस फुसफुसाने वाले से सुरक्षा माँगती है जो लोगों के दिलों में चुपके से घुस आता है।