بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلنَّاسِ
कहो, "मैं शरण लेता हूँ मनुष्यों के रब की
سُورَةُ النَّاسِ
क़ुरआन की समापन सूरह, ख़ुदा से उस फुसफुसाने वाले से सुरक्षा माँगती है जो लोगों के दिलों में चुपके से घुस आता है।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلنَّاسِ
कहो, "मैं शरण लेता हूँ मनुष्यों के रब की
مَلِكِ ٱلنَّاسِ
मनुष्यों के सम्राट की
إِلَٰهِ ٱلنَّاسِ
मनुष्यों के उपास्य की
مِن شَرِّ ٱلْوَسْوَاسِ ٱلْخَنَّاسِ
वसवसा डालनेवाले, खिसक जानेवाले की बुराई से
ٱلَّذِى يُوَسْوِسُ فِى صُدُورِ ٱلنَّاسِ
जो मनुष्यों के सीनों में वसवसा डालता हैं
مِنَ ٱلْجِنَّةِ وَٱلنَّاسِ
जो जिन्नों में से भी होता हैं और मनुष्यों में से भी