سُورَةُ المُرۡسَلَاتِ

Al-Mursalaatसंदेशवाहक

मक्की
50 आयतें~10 मिनट

इसकी ढोल जैसी चेतावनी, “उस दिन झुठलाने वालों के लिए तबाही,” पूरी सूरह में दस बार दोहराई जाती है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

77:1

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ وَٱلْمُرْسَلَٰتِ عُرْفًۭا

साक्षी है वे (हवाएँ) जिनकी चोटी छोड़ दी जाती है

77:2

فَٱلْعَٰصِفَٰتِ عَصْفًۭا

फिर ख़ूब तेज़ हो जाती है,

77:3

وَٱلنَّٰشِرَٰتِ نَشْرًۭا

और (बादलों को) उठाकर फैलाती है,

77:4

فَٱلْفَٰرِقَٰتِ فَرْقًۭا

फिर मामला करती है अलग-अलग,

77:5

فَٱلْمُلْقِيَٰتِ ذِكْرًا

फिर पेश करती है याददिहानी

77:6

عُذْرًا أَوْ نُذْرًا

इल्ज़ाम उतारने या चेतावनी देने के लिए,

77:7

إِنَّمَا تُوعَدُونَ لَوَٰقِعٌۭ

निस्संदेह जिसका वादा तुमसे किया जा रहा है वह निश्चित ही घटित होकर रहेगा

77:8

فَإِذَا ٱلنُّجُومُ طُمِسَتْ

अतः जब तारे विलुप्त (प्रकाशहीन) हो जाएँगे,

77:9

وَإِذَا ٱلسَّمَآءُ فُرِجَتْ

और जब आकाश फट जाएगा

77:10

وَإِذَا ٱلْجِبَالُ نُسِفَتْ

और पहाड़ चूर्ण-विचूर्ण होकर बिखर जाएँगे;

77:11

وَإِذَا ٱلرُّسُلُ أُقِّتَتْ

और जब रसूलों का हाल यह होगा कि उन का समय नियत कर दिया गया होगा -

77:12

لِأَىِّ يَوْمٍ أُجِّلَتْ

किस दिन के लिए वे टाले गए है?

77:13

لِيَوْمِ ٱلْفَصْلِ

फ़ैसले के दिन के लिए

77:14

وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِ

और तुम्हें क्या मालूम कि वह फ़ैसले का दिन क्या है? -

77:15

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ

तबाही है उस दिन झूठलाने-वालों की!

77:16

أَلَمْ نُهْلِكِ ٱلْأَوَّلِينَ

क्या ऐसा नहीं हुआ कि हमने पहलों को विनष्ट किया?

77:17

ثُمَّ نُتْبِعُهُمُ ٱلْءَاخِرِينَ

फिर उन्हीं के पीछे बादवालों को भी लगाते रहे?

77:18

كَذَٰلِكَ نَفْعَلُ بِٱلْمُجْرِمِينَ

अपराधियों के साथ हम ऐसा ही करते है

77:19

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ

तबाही है उस दिन झुठलानेवालो की!

77:20

أَلَمْ نَخْلُقكُّم مِّن مَّآءٍۢ مَّهِينٍۢ

क्या ऐस नहीं है कि हमने तुम्हे तुच्छ जल से पैदा किया,

77:21

فَجَعَلْنَٰهُ فِى قَرَارٍۢ مَّكِينٍ

फिर हमने उसे एक सुरक्षित टिकने की जगह रखा,

77:22

إِلَىٰ قَدَرٍۢ مَّعْلُومٍۢ

एक ज्ञात और निश्चित अवधि तक?

77:23

فَقَدَرْنَا فَنِعْمَ ٱلْقَٰدِرُونَ

फिर हमने अन्दाजा ठहराया, तो हम क्या ही अच्छा अन्दाज़ा ठहरानेवाले है

77:24

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ

तबाही है उस दिन झूठलानेवालों की!

77:25

أَلَمْ نَجْعَلِ ٱلْأَرْضَ كِفَاتًا

क्या ऐसा नहीं है कि हमने धरती को समेट रखनेवाली बनाया,

77:26

أَحْيَآءًۭ وَأَمْوَٰتًۭا

ज़िन्दों को भी और मुर्दों को भी,

77:27

وَجَعَلْنَا فِيهَا رَوَٰسِىَ شَٰمِخَٰتٍۢ وَأَسْقَيْنَٰكُم مَّآءًۭ فُرَاتًۭا

और उसमें ऊँचे-ऊँचे पहाड़ जमाए और तुम्हें मीठा पानी पिलाया?

77:28

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ

तबाही है उस दिन झुठलानेवालों की!

77:29

ٱنطَلِقُوٓا۟ إِلَىٰ مَا كُنتُم بِهِۦ تُكَذِّبُونَ

चलो उस चीज़ की ओर जिसे तुम झुठलाते रहे हो!

77:30

ٱنطَلِقُوٓا۟ إِلَىٰ ظِلٍّۢ ذِى ثَلَٰثِ شُعَبٍۢ

चलो तीन शाखाओंवाली छाया की ओर,

77:31

لَّا ظَلِيلٍۢ وَلَا يُغْنِى مِنَ ٱللَّهَبِ

जिसमें न छाँव है और न वह अग्नि-ज्वाला से बचा सकती है

77:32

إِنَّهَا تَرْمِى بِشَرَرٍۢ كَٱلْقَصْرِ

निस्संदेह वे (ज्वालाएँ) महल जैसी (ऊँची) चिंगारियाँ फेंकती है

77:33

كَأَنَّهُۥ جِمَٰلَتٌۭ صُفْرٌۭ

मानो वे पीले ऊँट हैं!

77:34

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ

तबाही है उस झुठलानेवालों की!

77:35

هَٰذَا يَوْمُ لَا يَنطِقُونَ

यह वह दिन है कि वे कुछ बोल नहीं रहे है,

77:36

وَلَا يُؤْذَنُ لَهُمْ فَيَعْتَذِرُونَ

तो कोई उज़ पेश करें, (बात यह है कि) उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी जा रही है

77:37

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ

तबाही है उस दिन झुठलानेवालों की

77:38

هَٰذَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِ ۖ جَمَعْنَٰكُمْ وَٱلْأَوَّلِينَ

"यह फ़ैसले का दिन है, हमने तुम्हें भी और पहलों को भी इकट्ठा कर दिया

77:39

فَإِن كَانَ لَكُمْ كَيْدٌۭ فَكِيدُونِ

"अब यदि तुम्हारे पास कोई चाल है तो मेरे विरुद्ध चलो।"

77:40

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ

तबाही है उस दिन झुठलानेवालो की!

77:41

إِنَّ ٱلْمُتَّقِينَ فِى ظِلَٰلٍۢ وَعُيُونٍۢ

निस्संदेह डर रखनेवाले छाँवों और स्रोतों में है,

77:42

وَفَوَٰكِهَ مِمَّا يَشْتَهُونَ

और उन फलों के बीच जो वे चाहे

77:43

كُلُوا۟ وَٱشْرَبُوا۟ هَنِيٓـًٔۢا بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ

"खाओ-पियो मज़े से, उस कर्मों के बदले में जो तुम करते रहे हो।"

77:44

إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ

निश्चय ही उत्तमकारों को हम ऐसा ही बदला देते है

77:45

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ

तबाही है उस दिन झुठलानेवालों की!

77:46

كُلُوا۟ وَتَمَتَّعُوا۟ قَلِيلًا إِنَّكُم مُّجْرِمُونَ

"खा लो और मज़े कर लो थोड़ा-सा, वास्तव में तुम अपराधी हो!"

77:47

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ

तबाही है उस दिन झुठलानेवालों की!

77:48

وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ ٱرْكَعُوا۟ لَا يَرْكَعُونَ

जब उनसे कहा जाता है कि "झुको! तो नहीं झुकते।"

77:49

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ

तबाही है उस दिन झुठलानेवालों की!

77:50

فَبِأَىِّ حَدِيثٍۭ بَعْدَهُۥ يُؤْمِنُونَ

अब आख़िर इसके पश्चात किस वाणी पर वे ईमान लाएँगे?

सूरह Al-Mursalaat के बारे में

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूरह Al-Mursalaat में कितनी आयतें हैं?
सूरह Al-Mursalaat (संदेशवाहक) कुरान का अध्याय 77 है और इसमें 50 आयतें हैं।
क्या सूरह Al-Mursalaat मक्का में या मदीना में अवतरित हुई थी?
सूरह Al-Mursalaat एक मक्की सूरह है, कुरान का 77वाँ अध्याय।
सूरह Al-Mursalaat किस बारे में है?
इसकी ढोल जैसी चेतावनी, “उस दिन झुठलाने वालों के लिए तबाही,” पूरी सूरह में दस बार दोहराई जाती है।