سُورَةُ التَّكۡوِيرِ

At-Takwirपलट देना

मक्की
29 आयतें~6 मिनट

दुनिया के बिखराव को चित्रित करती है — सूरज लपेट दिया गया, तारे मंद पड़ गए — और नन्ही बच्चियों को ज़िंदा दफ़नाने की निंदा करती है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

81:1

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ إِذَا ٱلشَّمْسُ كُوِّرَتْ

जब सूर्य लपेट दिया जाएगा,

81:2

وَإِذَا ٱلنُّجُومُ ٱنكَدَرَتْ

सारे तारे मैले हो जाएँगे,

81:3

وَإِذَا ٱلْجِبَالُ سُيِّرَتْ

जब पहाड़ चलाए जाएँगे,

81:4

وَإِذَا ٱلْعِشَارُ عُطِّلَتْ

जब दस मास की गाभिन ऊँटनियाँ आज़ाद छोड़ दी जाएँगी,

81:5

وَإِذَا ٱلْوُحُوشُ حُشِرَتْ

जब जंगली जानवर एकत्र किए जाएँगे,

81:6

وَإِذَا ٱلْبِحَارُ سُجِّرَتْ

जब समुद्र भड़का दिया जाएँगे,

81:7

وَإِذَا ٱلنُّفُوسُ زُوِّجَتْ

जब लोग क़िस्म-क़िस्म कर दिए जाएँगे,

81:8

وَإِذَا ٱلْمَوْءُۥدَةُ سُئِلَتْ

और जब जीवित गाड़ी गई लड़की से पूछा जाएगा,

81:9

بِأَىِّ ذَنۢبٍۢ قُتِلَتْ

कि उसकी हत्या किस गुनाह के कारण की गई,

81:10

وَإِذَا ٱلصُّحُفُ نُشِرَتْ

और जब कर्म-पत्र फैला दिए जाएँगे,

81:11

وَإِذَا ٱلسَّمَآءُ كُشِطَتْ

और जब आकाश की खाल उतार दी जाएगी,

81:12

وَإِذَا ٱلْجَحِيمُ سُعِّرَتْ

जब जहन्नम को दहकाया जाएगा,

81:13

وَإِذَا ٱلْجَنَّةُ أُزْلِفَتْ

और जब जन्नत निकट कर दी जाएगी,

81:14

عَلِمَتْ نَفْسٌۭ مَّآ أَحْضَرَتْ

तो कोई भी क्यक्ति जान लेगा कि उसने क्या उपस्थित किया है

81:15

فَلَآ أُقْسِمُ بِٱلْخُنَّسِ

अतः नहीं! मैं क़सम खाता हूँ पीछे हटनेवालों की,

81:16

ٱلْجَوَارِ ٱلْكُنَّسِ

चलनेवालों, छिपने-दुबकने-वालों की

81:17

وَٱلَّيْلِ إِذَا عَسْعَسَ

साक्षी है रात्रि जब वह प्रस्थान करे,

81:18

وَٱلصُّبْحِ إِذَا تَنَفَّسَ

और साक्षी है प्रातः जब वह साँस ले

81:19

إِنَّهُۥ لَقَوْلُ رَسُولٍۢ كَرِيمٍۢ

निश्चय ही वह एक आदरणीय संदेशवाहक की लाई हुई वाणी है,

81:20

ذِى قُوَّةٍ عِندَ ذِى ٱلْعَرْشِ مَكِينٍۢ

जो शक्तिवाला है, सिंहासनवाले के यहाँ जिसकी पैठ है

81:21

مُّطَاعٍۢ ثَمَّ أَمِينٍۢ

उसका आदेश माना जाता है, वहाँ वह विश्वासपात्र है

81:22

وَمَا صَاحِبُكُم بِمَجْنُونٍۢ

तुम्हारा साथी कोई दीवाना नहीं,

81:23

وَلَقَدْ رَءَاهُ بِٱلْأُفُقِ ٱلْمُبِينِ

उसने तो (पराकाष्ठान के) प्रत्यक्ष क्षितिज पर होकर उस (फ़रिश्ते) को देखा है

81:24

وَمَا هُوَ عَلَى ٱلْغَيْبِ بِضَنِينٍۢ

और वह परोक्ष के मामले में कृपण नहीं है,

81:25

وَمَا هُوَ بِقَوْلِ شَيْطَٰنٍۢ رَّجِيمٍۢ

और वह (क़ुरआन) किसी धुतकारे हुए शैतान की लाई हुई वाणी नहीं है

81:26

فَأَيْنَ تَذْهَبُونَ

फिर तुम किधर जा रहे हो?

81:27

إِنْ هُوَ إِلَّا ذِكْرٌۭ لِّلْعَٰلَمِينَ

वह तो सारे संसार के लिए बस एक अनुस्मृति है,

81:28

لِمَن شَآءَ مِنكُمْ أَن يَسْتَقِيمَ

उसके लिए तो तुममे से सीधे मार्ग पर चलना चाहे

81:29

وَمَا تَشَآءُونَ إِلَّآ أَن يَشَآءَ ٱللَّهُ رَبُّ ٱلْعَٰلَمِينَ

और तुम नहीं चाह सकते सिवाय इसके कि सारे जहान का रब अल्लाह चाहे

सूरह At-Takwir के बारे में

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूरह At-Takwir में कितनी आयतें हैं?
सूरह At-Takwir (पलट देना) कुरान का अध्याय 81 है और इसमें 29 आयतें हैं।
क्या सूरह At-Takwir मक्का में या मदीना में अवतरित हुई थी?
सूरह At-Takwir एक मक्की सूरह है, कुरान का 81वाँ अध्याय।
सूरह At-Takwir किस बारे में है?
दुनिया के बिखराव को चित्रित करती है — सूरज लपेट दिया गया, तारे मंद पड़ गए — और नन्ही बच्चियों को ज़िंदा दफ़नाने की निंदा करती है।