سُورَةُ الانشِقَاقِ

Al-Inshiqaaqफट जाना

मक्की
25 आयतें~5 मिनट۩

धरती को समतल फैली हुई और अपने भीतर की हर चीज़ को अपने रब के हुक्म पर उगलकर ख़ाली होते हुए चित्रित करती है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

84:1

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ إِذَا ٱلسَّمَآءُ ٱنشَقَّتْ

जबकि आकाश फट जाएगा,

84:2

وَأَذِنَتْ لِرَبِّهَا وَحُقَّتْ

और वह अपने रब की सुनेगा, और उसे यही चाहिए भी

84:3

وَإِذَا ٱلْأَرْضُ مُدَّتْ

जब धरती फैला दी जाएगी

84:4

وَأَلْقَتْ مَا فِيهَا وَتَخَلَّتْ

और जो कुछ उसके भीतर है उसे बाहर डालकर खाली हो जाएगी

84:5

وَأَذِنَتْ لِرَبِّهَا وَحُقَّتْ

और वह अपने रब की सुनेगी, और उसे यही चाहिए भी

84:6

يَٰٓأَيُّهَا ٱلْإِنسَٰنُ إِنَّكَ كَادِحٌ إِلَىٰ رَبِّكَ كَدْحًۭا فَمُلَٰقِيهِ

ऐ मनुष्य! तू मशक़्क़त करता हुआ अपने रब ही की ओर खिंचा चला जा रहा है और अन्ततः उससे मिलने वाला है

84:7

فَأَمَّا مَنْ أُوتِىَ كِتَٰبَهُۥ بِيَمِينِهِۦ

फिर जिस किसी को उसका कर्म-पत्र उसके दाहिने हाथ में दिया गया,

84:8

فَسَوْفَ يُحَاسَبُ حِسَابًۭا يَسِيرًۭا

तो उससे आसान, सरसरी हिसाब लिया जाएगा

84:9

وَيَنقَلِبُ إِلَىٰٓ أَهْلِهِۦ مَسْرُورًۭا

और वह अपने लोगों की ओर ख़ुश-ख़ुश पलटेगा

84:10

وَأَمَّا مَنْ أُوتِىَ كِتَٰبَهُۥ وَرَآءَ ظَهْرِهِۦ

और रह वह व्यक्ति जिसका कर्म-पत्र (उसके बाएँ हाथ में) उसकी पीठ के पीछे से दिया गया,

84:11

فَسَوْفَ يَدْعُوا۟ ثُبُورًۭا

तो वह विनाश (मृत्यु) को पुकारेगा,

84:12

وَيَصْلَىٰ سَعِيرًا

और दहकती आग में जा पड़ेगा

84:13

إِنَّهُۥ كَانَ فِىٓ أَهْلِهِۦ مَسْرُورًا

वह अपने लोगों में मग्न था,

84:14

إِنَّهُۥ ظَنَّ أَن لَّن يَحُورَ

उसने यह समझ रखा था कि उसे कभी पलटना नहीं है

84:15

بَلَىٰٓ إِنَّ رَبَّهُۥ كَانَ بِهِۦ بَصِيرًۭا

क्यों नहीं, निश्चय ही उसका रब तो उसे देख रहा था!

84:16

فَلَآ أُقْسِمُ بِٱلشَّفَقِ

अतः कुछ नहीं, मैं क़सम खाता हूँ सांध्य-लालिमा की,

84:17

وَٱلَّيْلِ وَمَا وَسَقَ

और रात की और उसके समेट लेने की,

84:18

وَٱلْقَمَرِ إِذَا ٱتَّسَقَ

और चन्द्रमा की जबकि वह पूर्ण हो जाता है,

84:19

لَتَرْكَبُنَّ طَبَقًا عَن طَبَقٍۢ

निश्चय ही तुम्हें मंजिल पर मंजिल चढ़ना है

84:20

فَمَا لَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ

फिर उन्हें क्या हो गया है कि ईमान नहीं लाते?

84:21۩

وَإِذَا قُرِئَ عَلَيْهِمُ ٱلْقُرْءَانُ لَا يَسْجُدُونَ ۩

और जब उन्हें कुरआन पढ़कर सुनाया जाता है तो सजदे में नहीं गिर पड़ते?

84:22

بَلِ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ يُكَذِّبُونَ

नहीं, बल्कि इनकार करनेवाले तो झुठलाते है,

84:23

وَٱللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا يُوعُونَ

हालाँकि जो कुछ वे अपने अन्दर एकत्र कर रहे है, अल्लाह उसे भली-भाँति जानता है

84:24

فَبَشِّرْهُم بِعَذَابٍ أَلِيمٍ

अतः उन्हें दुखद यातना की मंगल सूचना दे दो

84:25

إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّٰلِحَٰتِ لَهُمْ أَجْرٌ غَيْرُ مَمْنُونٍۭ

अलबत्ता जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए उनके लिए कभी न समाप्त॥ होनेवाला प्रतिदान है

सूरह Al-Inshiqaaq के बारे में

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूरह Al-Inshiqaaq में कितनी आयतें हैं?
सूरह Al-Inshiqaaq (फट जाना) कुरान का अध्याय 84 है और इसमें 25 आयतें हैं।
क्या सूरह Al-Inshiqaaq मक्का में या मदीना में अवतरित हुई थी?
सूरह Al-Inshiqaaq एक मक्की सूरह है, कुरान का 84वाँ अध्याय।
सूरह Al-Inshiqaaq किस बारे में है?
धरती को समतल फैली हुई और अपने भीतर की हर चीज़ को अपने रब के हुक्म पर उगलकर ख़ाली होते हुए चित्रित करती है।