سُورَةُ البَلَدِ

Al-Baladशहर

मक्की
20 आयतें~4 मिनट

पवित्र नगर मक्का की क़सम खाती है, और नेकी के कठिन चढ़ाई भरे रास्ते का वर्णन करती है: एक ग़ुलाम को आज़ाद करना और भूखे को खाना खिलाना।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

90:1

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ لَآ أُقْسِمُ بِهَٰذَا ٱلْبَلَدِ

सुनो! मैं क़सम खाता हूँ इस नगर (मक्का) की -

90:2

وَأَنتَ حِلٌّۢ بِهَٰذَا ٱلْبَلَدِ

हाल यह है कि तुम इसी नगर में रह रहे हो -

90:3

وَوَالِدٍۢ وَمَا وَلَدَ

और बाप और उसकी सन्तान की,

90:4

لَقَدْ خَلَقْنَا ٱلْإِنسَٰنَ فِى كَبَدٍ

निस्संदेह हमने मनुष्य को पूर्ण मशक़्क़त (अनुकूलता और सन्तुलन) के साथ पैदा किया

90:5

أَيَحْسَبُ أَن لَّن يَقْدِرَ عَلَيْهِ أَحَدٌۭ

क्या वह समझता है कि उसपर किसी का बस न चलेगा?

90:6

يَقُولُ أَهْلَكْتُ مَالًۭا لُّبَدًا

कहता है कि "मैंने ढेरो माल उड़ा दिया।"

90:7

أَيَحْسَبُ أَن لَّمْ يَرَهُۥٓ أَحَدٌ

क्या वह समझता है कि किसी ने उसे देखा नहीं?

90:8

أَلَمْ نَجْعَل لَّهُۥ عَيْنَيْنِ

क्या हमने उसे नहीं दी दो आँखें,

90:9

وَلِسَانًۭا وَشَفَتَيْنِ

और एक ज़बान और दो होंठ?

90:10

وَهَدَيْنَٰهُ ٱلنَّجْدَيْنِ

और क्या ऐसा नहीं है कि हमने दिखाई उसे दो ऊँचाइयाँ?

90:11

فَلَا ٱقْتَحَمَ ٱلْعَقَبَةَ

किन्तु वह तो हुमककर घाटी में से गुजंरा ही नहीं और (न उसने मुक्ति का मार्ग पाया)

90:12

وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا ٱلْعَقَبَةُ

और तुम्हें क्या मालूम कि वह घाटी क्या है!

90:13

فَكُّ رَقَبَةٍ

किसी गरदन का छुड़ाना

90:14

أَوْ إِطْعَٰمٌۭ فِى يَوْمٍۢ ذِى مَسْغَبَةٍۢ

या भूख के दिन खाना खिलाना

90:15

يَتِيمًۭا ذَا مَقْرَبَةٍ

किसी निकटवर्ती अनाथ को,

90:16

أَوْ مِسْكِينًۭا ذَا مَتْرَبَةٍۢ

या धूल-धूसरित मुहताज को;

90:17

ثُمَّ كَانَ مِنَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَتَوَاصَوْا۟ بِٱلصَّبْرِ وَتَوَاصَوْا۟ بِٱلْمَرْحَمَةِ

फिर यह कि वह उन लोगों में से हो जो ईमान लाए और जिन्होंने एक-दूसरे को धैर्य की ताकीद की , और एक-दूसरे को दया की ताकीद की

90:18

أُو۟لَٰٓئِكَ أَصْحَٰبُ ٱلْمَيْمَنَةِ

वही लोग है सौभाग्यशाली

90:19

وَٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ بِـَٔايَٰتِنَا هُمْ أَصْحَٰبُ ٱلْمَشْـَٔمَةِ

रहे वे लोग जिन्होंने हमारी आयातों का इनकार किया, वे दुर्भाग्यशाली लोग है

90:20

عَلَيْهِمْ نَارٌۭ مُّؤْصَدَةٌۢ

उनपर आग होगी, जिसे बन्द कर दिया गया होगा

सूरह Al-Balad के बारे में

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूरह Al-Balad में कितनी आयतें हैं?
सूरह Al-Balad (शहर) कुरान का अध्याय 90 है और इसमें 20 आयतें हैं।
क्या सूरह Al-Balad मक्का में या मदीना में अवतरित हुई थी?
सूरह Al-Balad एक मक्की सूरह है, कुरान का 90वाँ अध्याय।
सूरह Al-Balad किस बारे में है?
पवित्र नगर मक्का की क़सम खाती है, और नेकी के कठिन चढ़ाई भरे रास्ते का वर्णन करती है: एक ग़ुलाम को आज़ाद करना और भूखे को खाना खिलाना।