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अनाथों के बारे में कुरान की आयतें

अनाथों की देखभाल कुरान में एक दोहराया गया नैतिक परीक्षण है — उनकी संपत्ति की रक्षा करना, दयालुता से बात करना और उत्पीड़न से इनकार करना। ये आयतें इस्लामी सामाजिक नैतिकता के केंद्र में बनी हुई हैं।

ये चयन चिंतन के लिए प्रारंभिक बिंदु हैं। आयतों को हमेशा उनके पूर्ण संदर्भ में पढ़ें।

चयनित आयतें

  1. فَأَمَّا ٱلْيَتِيمَ فَلَا تَقْهَرْ

    अतः जो अनाथ हो उसे मत दबाना,

  2. وَءَاتُوا۟ ٱلْيَتَٰمَىٰٓ أَمْوَٰلَهُمْ ۖ وَلَا تَتَبَدَّلُوا۟ ٱلْخَبِيثَ بِٱلطَّيِّبِ ۖ وَلَا تَأْكُلُوٓا۟ أَمْوَٰلَهُمْ إِلَىٰٓ أَمْوَٰلِكُمْ ۚ إِنَّهُۥ كَانَ حُوبًۭا كَبِيرًۭا

    और अनाथों को उनका माल दे दो और बुरी चीज़ को अच्छी चीज़ से न बदलो, और न उनके माल को अपने माल के साथ मिलाकर खा जाओ। यह बहुत बड़ा गुनाह हैं

  3. إِنَّ ٱلَّذِينَ يَأْكُلُونَ أَمْوَٰلَ ٱلْيَتَٰمَىٰ ظُلْمًا إِنَّمَا يَأْكُلُونَ فِى بُطُونِهِمْ نَارًۭا ۖ وَسَيَصْلَوْنَ سَعِيرًۭا

    जो लोग अनाथों के माल अन्याय के साथ खाते है, वास्तव में वे अपने पेट आग से भरते है, और वे अवश्य भड़कती हुई आग में पड़ेगे

  4. فِى ٱلدُّنْيَا وَٱلْءَاخِرَةِ ۗ وَيَسْـَٔلُونَكَ عَنِ ٱلْيَتَٰمَىٰ ۖ قُلْ إِصْلَاحٌۭ لَّهُمْ خَيْرٌۭ ۖ وَإِن تُخَالِطُوهُمْ فَإِخْوَٰنُكُمْ ۚ وَٱللَّهُ يَعْلَمُ ٱلْمُفْسِدَ مِنَ ٱلْمُصْلِحِ ۚ وَلَوْ شَآءَ ٱللَّهُ لَأَعْنَتَكُمْ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَزِيزٌ حَكِيمٌۭ

    और वे तुमसे अनाथों के विषय में पूछते है। कहो, "उनके सुधार की जो रीति अपनाई जाए अच्छी है। और यदि तुम उन्हें अपने साथ सम्मिलित कर लो तो वे तुम्हारे भाई-बन्धु ही हैं। और अल्लाह बिगाड़ पैदा करनेवाले को बचाव पैदा करनेवाले से अलग पहचानता है। और यदि अल्लाह चाहता तो तुमको ज़हमत (कठिनाई) में डाल देता। निस्संदेह अल्लाह प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है।"

सामान्य प्रश्न

कुरान अनाथों के दुर्व्यवहार को कैसे देखता है?
यह अनाथों की संपत्ति को गलत तरीके से हड़पने के खिलाफ कड़ी चेतावनी देता है (जैसे 4:10) और अनाथ पर अत्याचार न करने का आदेश देता है (93:9)।

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