कुरान के अंश

अल-कह्फ़ की पहली दस आयतें

18:1

ٱلْحَمْدُ لِلَّهِ ٱلَّذِىٓ أَنزَلَ عَلَىٰ عَبْدِهِ ٱلْكِتَٰبَ وَلَمْ يَجْعَل لَّهُۥ عِوَجَا ۜ

प्रशंसा अल्लाह के लिए है जिसने अपने बन्दे पर यह किताब अवतरित की और उसमें (अर्थात उस बन्दे में) कोई टेढ़ नहीं रखी,

18:2

قَيِّمًۭا لِّيُنذِرَ بَأْسًۭا شَدِيدًۭا مِّن لَّدُنْهُ وَيُبَشِّرَ ٱلْمُؤْمِنِينَ ٱلَّذِينَ يَعْمَلُونَ ٱلصَّٰلِحَٰتِ أَنَّ لَهُمْ أَجْرًا حَسَنًۭا

ठीक और दूरुस्त, ताकि एक कठोर आपदा से सावधान कर दे जो उसकी और से आ पड़ेगी। और मोमिनों को, जो अच्छे कर्म करते है, शुभ सूचना दे दे कि उनके लिए अच्छा बदला है;

18:3

مَّٰكِثِينَ فِيهِ أَبَدًۭا

जिसमें वे सदैव रहेंगे

18:4

وَيُنذِرَ ٱلَّذِينَ قَالُوا۟ ٱتَّخَذَ ٱللَّهُ وَلَدًۭا

और उनको सावधान कर दे, जो कहते है, "अल्लाह सन्तानवाला है।"

18:5

مَّا لَهُم بِهِۦ مِنْ عِلْمٍۢ وَلَا لِءَابَآئِهِمْ ۚ كَبُرَتْ كَلِمَةًۭ تَخْرُجُ مِنْ أَفْوَٰهِهِمْ ۚ إِن يَقُولُونَ إِلَّا كَذِبًۭا

इसका न उन्हें कोई ज्ञान है और न उनके बाप-दादा ही को था। बड़ी बात है जो उनके मुँह से निकलती है। वे केवल झूठ बोलते है

18:6

فَلَعَلَّكَ بَٰخِعٌۭ نَّفْسَكَ عَلَىٰٓ ءَاثَٰرِهِمْ إِن لَّمْ يُؤْمِنُوا۟ بِهَٰذَا ٱلْحَدِيثِ أَسَفًا

अच्छा, शायद उनके पीछे, यदि उन्होंने यह बात न मानी तो तुम अफ़सोस के मारे अपने प्राण ही खो दोगे!

18:7

إِنَّا جَعَلْنَا مَا عَلَى ٱلْأَرْضِ زِينَةًۭ لَّهَا لِنَبْلُوَهُمْ أَيُّهُمْ أَحْسَنُ عَمَلًۭا

धरती पर जो कुछ है उसे तो हमने उसकी शोभा बनाई है, ताकि हम उनकी परीक्षा लें कि उनमें कर्म की दृष्टि से कौन उत्तम है

18:8

وَإِنَّا لَجَٰعِلُونَ مَا عَلَيْهَا صَعِيدًۭا جُرُزًا

और जो कुछ उसपर है उसे तो हम एक चटियल मैदान बना देनेवाले है

18:9

أَمْ حَسِبْتَ أَنَّ أَصْحَٰبَ ٱلْكَهْفِ وَٱلرَّقِيمِ كَانُوا۟ مِنْ ءَايَٰتِنَا عَجَبًا

क्या तुम समझते हो कि गुफा और रक़ीमवाले हमारी अद्भु त निशानियों में से थे?

18:10

إِذْ أَوَى ٱلْفِتْيَةُ إِلَى ٱلْكَهْفِ فَقَالُوا۟ رَبَّنَآ ءَاتِنَا مِن لَّدُنكَ رَحْمَةًۭ وَهَيِّئْ لَنَا مِنْ أَمْرِنَا رَشَدًۭا

जब उन नवयुवकों ने गुफ़ा में जाकर शरण ली तो कहा, "हमारे रब! हमें अपने यहाँ से दयालुता प्रदान कर और हमारे लिए हमारे अपने मामले को ठीक कर दे।"

सूरह अल-कह्फ़ की पहली दस आयतें कुरान 18:1–10 हैं। एक सहीह हदीस कहती है कि जो कोई अल-कह्फ़ की शुरुआत से दस आयतें याद कर ले, वह दज्जाल से सुरक्षित रहेगा। कुछ रिवायतें इसके बजाय अंतिम दस का ज़िक्र करती हैं। यह पृष्ठ शुरुआत की दस आयतें हैं, जिनसे गुफा की कहानी शुरू होती है।

अरबी और अनुवाद, आपके चुने हुए क़ारी के साथ क्रम से चलाए जाते हैं।

सामान्य प्रश्न

सूरह अल-कह्फ़ की पहली 10 आयतें कौन सी हैं?
वे कुरान 18:1 से 18:10 तक हैं। वे सूरह की शुरुआत करती हैं और उन नौजवानों के बयान तक ले जाती हैं जिन्होंने गुफा में पनाह ली।
लोग अल-कह्फ़ की पहली दस आयतें क्यों पढ़ते हैं?
एक सहीह हदीस कहती है कि सूरह अल-कह्फ़ की शुरुआत की दस आयतें याद करने से व्यक्ति दज्जाल से सुरक्षित रहता है। पूरी सूरह आमतौर पर जुमा के दिन भी पढ़ी जाती है।