चार क़ुल
अल-काफ़िरून109:1–6
قُلْ يَٰٓأَيُّهَا ٱلْكَٰفِرُونَ
कह दो, "ऐ इनकार करनेवालो!"
لَآ أَعْبُدُ مَا تَعْبُدُونَ
मैं वैसी बन्दगी नहीं करूँगा जैसी बन्दगी तुम करते हो,
وَلَآ أَنتُمْ عَٰبِدُونَ مَآ أَعْبُدُ
और न तुम वैसी बन्दगी करनेवाले हो जैसी बन्दगी में करता हूँ
وَلَآ أَنَا۠ عَابِدٌۭ مَّا عَبَدتُّمْ
और न मैं वैसी बन्दगी करनेवाला हूँ जैसी बन्दगी तुमने की है
وَلَآ أَنتُمْ عَٰبِدُونَ مَآ أَعْبُدُ
और न तुम वैसी बन्दगी करनेवाला हुए जैसी बन्दगी मैं करता हूँ
لَكُمْ دِينُكُمْ وَلِىَ دِينِ
तुम्हारे लिए तूम्हारा धर्म है और मेरे लिए मेरा धर्म!"
अल-इख़्लास112:1–4
قُلْ هُوَ ٱللَّهُ أَحَدٌ
कहो, "वह अल्लाह यकता है,
ٱللَّهُ ٱلصَّمَدُ
अल्लाह निरपेक्ष (और सर्वाधार) है,
لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ
न वह जनिता है और न जन्य,
وَلَمْ يَكُن لَّهُۥ كُفُوًا أَحَدٌۢ
और न कोई उसका समकक्ष है।"
अल-फ़लक113:1–5
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلْفَلَقِ
कहो, "मैं शरण लेता हूँ, प्रकट करनेवाले रब की,
مِن شَرِّ مَا خَلَقَ
जो कुछ भी उसने पैदा किया उसकी बुराई से,
وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ
और अँधेरे की बुराई से जबकि वह घुस आए,
وَمِن شَرِّ ٱلنَّفَّٰثَٰتِ فِى ٱلْعُقَدِ
और गाँठो में फूँक मारने-वालों की बुराई से,
وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ
और ईर्ष्यालु की बुराई से, जब वह ईर्ष्या करे।"
अन-नास114:1–6
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلنَّاسِ
कहो, "मैं शरण लेता हूँ मनुष्यों के रब की
مَلِكِ ٱلنَّاسِ
मनुष्यों के सम्राट की
إِلَٰهِ ٱلنَّاسِ
मनुष्यों के उपास्य की
مِن شَرِّ ٱلْوَسْوَاسِ ٱلْخَنَّاسِ
वसवसा डालनेवाले, खिसक जानेवाले की बुराई से
ٱلَّذِى يُوَسْوِسُ فِى صُدُورِ ٱلنَّاسِ
जो मनुष्यों के सीनों में वसवसा डालता हैं
مِنَ ٱلْجِنَّةِ وَٱلنَّاسِ
जो जिन्नों में से भी होता हैं और मनुष्यों में से भी
चार क़ुल उन छोटी सूरहों का एक प्रचलित समूह हैं जो क़ुल से शुरू होती हैं: अल-काफ़िरून, अल-इख़्लास, अल-फ़लक और अन-नास। अंत की तीन क़ुल वह समूह हैं जो सोने से पहले सिखाया गया है। अल-काफ़िरून अक्सर उनके आगे रखी जाती है, और यह पृष्ठ उसी क्रम में चारों को चलाता है।
अरबी और अनुवाद, आपके चुने हुए क़ारी के साथ क्रम से चलाए जाते हैं।
सामान्य प्रश्न
- चार क़ुल कौन सी हैं?
- सूरह अल-काफ़िरून (109), अल-इख़्लास (112), अल-फ़लक (113), और अन-नास (114)। हर एक क़ुल से शुरू होती है।
- क्या चार क़ुल और तीन क़ुल एक ही हैं?
- तीन क़ुल अल-इख़्लास, अल-फ़लक और अन-नास हैं। चार क़ुल उनके आगे अल-काफ़िरून जोड़ती हैं।