अल-मुअव्विज़तैन
अल-फ़लक113:1–5
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلْفَلَقِ
कहो, "मैं शरण लेता हूँ, प्रकट करनेवाले रब की,
مِن شَرِّ مَا خَلَقَ
जो कुछ भी उसने पैदा किया उसकी बुराई से,
وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ
और अँधेरे की बुराई से जबकि वह घुस आए,
وَمِن شَرِّ ٱلنَّفَّٰثَٰتِ فِى ٱلْعُقَدِ
और गाँठो में फूँक मारने-वालों की बुराई से,
وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ
और ईर्ष्यालु की बुराई से, जब वह ईर्ष्या करे।"
अन-नास114:1–6
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلنَّاسِ
कहो, "मैं शरण लेता हूँ मनुष्यों के रब की
مَلِكِ ٱلنَّاسِ
मनुष्यों के सम्राट की
إِلَٰهِ ٱلنَّاسِ
मनुष्यों के उपास्य की
مِن شَرِّ ٱلْوَسْوَاسِ ٱلْخَنَّاسِ
वसवसा डालनेवाले, खिसक जानेवाले की बुराई से
ٱلَّذِى يُوَسْوِسُ فِى صُدُورِ ٱلنَّاسِ
जो मनुष्यों के सीनों में वसवसा डालता हैं
مِنَ ٱلْجِنَّةِ وَٱلنَّاسِ
जो जिन्नों में से भी होता हैं और मनुष्यों में से भी
अल-मुअव्विज़तैन सूरह अल-फ़लक और सूरह अन-नास हैं, पनाह माँगने की दो सूरहें। पैगंबर हिफाज़त के लिए उनका पाठ करते थे, और बीमारी में भी उनका पाठ करते थे। वे तीन क़ुल की अंतिम दो भी हैं। यह पृष्ठ इस जोड़ी को अकेले चलाता है।
अरबी और अनुवाद, आपके चुने हुए क़ारी के साथ क्रम से चलाए जाते हैं।
सामान्य प्रश्न
- अल-मुअव्विज़तैन क्या हैं?
- सूरह अल-फ़लक (113) और सूरह अन-नास (114)। इस नाम का अर्थ है वे दो सूरहें जिनके ज़रिए पनाह माँगी जाती है।
- अल-फ़लक और अन-नास कब पढ़ी जाती हैं?
- वे हिफाज़त के लिए पढ़ी जाती हैं, जिसमें किसी के बीमार होने का समय भी शामिल है, और वे सोने से पहले पढ़ी जाने वाली तीन क़ुल का हिस्सा हैं। जब तीन क़ुल पढ़ी जाती हैं तो अल-इख़्लास भी जोड़ दी जाती है।