कुरान के अंश

तीन क़ुल

अल-इख़्लास112:1–4

112:1

قُلْ هُوَ ٱللَّهُ أَحَدٌ

कहो, "वह अल्लाह यकता है,

112:2

ٱللَّهُ ٱلصَّمَدُ

अल्लाह निरपेक्ष (और सर्वाधार) है,

112:3

لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ

न वह जनिता है और न जन्य,

112:4

وَلَمْ يَكُن لَّهُۥ كُفُوًا أَحَدٌۢ

और न कोई उसका समकक्ष है।"

अल-फ़लक113:1–5

113:1

قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلْفَلَقِ

कहो, "मैं शरण लेता हूँ, प्रकट करनेवाले रब की,

113:2

مِن شَرِّ مَا خَلَقَ

जो कुछ भी उसने पैदा किया उसकी बुराई से,

113:3

وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ

और अँधेरे की बुराई से जबकि वह घुस आए,

113:4

وَمِن شَرِّ ٱلنَّفَّٰثَٰتِ فِى ٱلْعُقَدِ

और गाँठो में फूँक मारने-वालों की बुराई से,

113:5

وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ

और ईर्ष्यालु की बुराई से, जब वह ईर्ष्या करे।"

अन-नास114:1–6

114:1

قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلنَّاسِ

कहो, "मैं शरण लेता हूँ मनुष्यों के रब की

114:2

مَلِكِ ٱلنَّاسِ

मनुष्यों के सम्राट की

114:3

إِلَٰهِ ٱلنَّاسِ

मनुष्यों के उपास्य की

114:4

مِن شَرِّ ٱلْوَسْوَاسِ ٱلْخَنَّاسِ

वसवसा डालनेवाले, खिसक जानेवाले की बुराई से

114:5

ٱلَّذِى يُوَسْوِسُ فِى صُدُورِ ٱلنَّاسِ

जो मनुष्यों के सीनों में वसवसा डालता हैं

114:6

مِنَ ٱلْجِنَّةِ وَٱلنَّاسِ

जो जिन्नों में से भी होता हैं और मनुष्यों में से भी

तीन क़ुल सूरह अल-इख़्लास, अल-फ़लक और अन-नास हैं, वे तीन छोटी सूरहें जो क़ुल से शुरू होती हैं। पैगंबर सोने से पहले उनका पाठ करते थे, अपनी हथेलियों में फूँकते थे, और उन्हें अपने शरीर पर फेरते थे। उन्हें यहाँ उसी क्रम में पढ़ें, अरबी, अनुवाद और ऑडियो के साथ।

अरबी और अनुवाद, आपके चुने हुए क़ारी के साथ क्रम से चलाए जाते हैं।

सामान्य प्रश्न

तीन क़ुल कौन सी हैं?
सूरह अल-इख़्लास (112), अल-फ़लक (113), और अन-नास (114)। हर एक शब्द क़ुल, “कह दो”, से शुरू होती है।
तीन क़ुल मुअव्विज़तैन से कैसे अलग हैं?
मुअव्विज़तैन अल-फ़लक और अन-नास हैं, पनाह माँगने की दो सूरहें। तीन क़ुल वे दो और अल-इख़्लास हैं।